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के लिए 2023 बढ़ती क्रिप्टोकरेंसी

के लिए 2023 बढ़ती क्रिप्टोकरेंसी

केंद्र सरकार ने 1 साल के लिए चीनी के निर्यात पर लगाया प्रतिबंध, जानें वजह

नई दिल्ली: दुनिया में चीनी के सबसे बड़े उत्पादक देश भारत ने घरेलू बाजार में कीमतों में के लिए 2023 बढ़ती क्रिप्टोकरेंसी बढ़ोतरी को रोकने के लिए अक्टूबर 2023 तक इसके निर्यात पर प्रतिबंधित लगा दिया है. सरकार और उद्योग के अधिकारियों के अनुसार, भारत को इस साल रिकॉर्ड गन्ने का उत्पादन करने की उम्मीद है. साल 2021-22 के विपणन वर्ष में भारत का चीनी निर्यात 57% बढ़कर 109.8 लाख टन हो गया, जो कि सितंबर में समाप्त हुआ. इससे लगभग 40,000 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा के लिए 2023 बढ़ती क्रिप्टोकरेंसी भारत को प्राप्त हुआ.

इसी तरह विपणन वर्ष 2021-22 (अक्टूबर-सितंबर) के अंत में, किसानों के लिए गन्ना बकाया में केवल 6,000 करोड़ रुपये थे, क्योंकि मिलों ने उन्हें पहले ही 1.18 लाख करोड़ रुपये की कुल देय राशि का 1.12 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया था. खाद्य मंत्रालय ने बताया कि 2021-22 विपणन वर्ष के लिए “भारत दुनिया का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक और उपभोक्ता के साथ-साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी निर्यातक के रूप में उभरा है”.

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80 लाख टन तक के निर्यात की अनुमति मिल सकती है
2021 और 2022 के बीच देश में 5,000 लाख टन से अधिक गन्ने का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ, जिसमें से चीनी के लिए 2023 बढ़ती क्रिप्टोकरेंसी मिलों ने लगभग 3,574 लाख टन की पेराई करके लगभग 394 लाख टन चीनी (सुक्रोज) का उत्पादन किया. इसमें से 359 लाख टन चीनी का उत्पादन चीनी मिलों द्वारा किया गया, जबकि 35 लाख टन चीनी को एथेनॉल निर्माण के लिए डायवर्ट किया गया. गन्ने की पेराई का मौसम अक्सर अक्टूबर या नवंबर में शुरू होता है और अप्रैल के मध्य तक रहता है, जबकि चीनी का मौसम आमतौर पर अक्टूबर से सितंबर तक चलता है. वहीं, भारत में इस साल रिकॉर्ड चीनी फसल का उत्पादन होने की उम्मीद है, जिससे नई दिल्ली को 80 लाख टन तक के निर्यात की अनुमति मिल सकती है.

गेहूं के आटे की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगेगा
बता दें कि इससे पहले, मई हीने में सरकार ने 1 जून, 2022 से प्रभावी चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी. तब केंद्र सरकार ने कहा था कि घरेलू उपलब्धता और मूल्य स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से 1 जून से चीनी निर्यात को विनियमित करने का निर्णय लिया गया था. वहीं, अगस्त महीने में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (CCEA) ने गेहूं या मेसलिन के आटे के लिए छूट की नीति में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. यह कदम अब गेहूं के आटे के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की अनुमति देगा, जिससे देश में गेहूं के आटे की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगेगा.

Cryptocurrency: जानिए सभी करेंसी के नाम और उनकी कीमतों के बारे में

Cryptocurrency: जानिए सभी करेंसी के नाम और उनकी कीमतों के बारे में

आजकल हर जगह Cryptocurrency का खूब जिक्र किया जा रहा है. वहीं हर कोई व्यक्ति जानना चाहता है, कि आखिर क्यों यह इतने कम समय में एक के लिए 2023 बढ़ती क्रिप्टोकरेंसी महत्वपूर्ण चीज बन गई है. आपको बता दें, की दुनिया में हर जगह पर Cryptocurrency को लेकर लोगों के बीच काफी उत्साह है. अभी कुछ लोगों को इसके बारे में थोड़ी बहुत जानकारी है. लेकिन अभी, उन्हें यह नहीं पता कि इसका इस्तेमाल कैसे करना है.

आपको बता दें, कि Cryptocurrency डिजिटल दुनिया की देन है. आजकल की डिजिटल दुनिया में कई तरह की खोज की जा रही हैं. इन्हीं खोजों में से एक खोज का नाम Cryptocurrency है. इसके नाम से पता चल रहा है, कि यह किसी प्रकार की मुद्रा या करेंसी है. इसे एक ई-करेंसी या डिजिटल करेंसी के रूप में देखा जाता है. बता दें, कि यह अन्य करेंसियों जैसी नहीं होती है. इन करेंसी का लेन-देन कंप्यूटर के माध्यम से ही किया जाता है. आप भी Cryptocurrency को यूरो, डॉलर या फिर किसी भी मुद्रा से खरीद सकते हैं.

Cryptocurrency के इस्तेमाल से दो लोगों के बीच डिजिटली हो रहे लेन-देन को सुरक्षित तरीके से किया जा सकता है. ई-करेंसी को, डिजिटल या वास्तविक करेंसी के आदान-प्रदान के लिए क्रिप्टोग्राफी का प्रयोग किया जाने लगा है. जिसके कारण ई-करेंसी, डिजिटल या वास्तविक करेंसी को Cryptocurrency कहा जाता है.

जानिए प्रसिद्ध Cryptocurrency के नाम की सूची और उनकी कीमत

आपकी जानकारी के लिए बता दें, कि दुनिया में आज कई तरह की Cryptocurrency मौजूद हैं. इन Cryptocurrency को लोगों द्वारा खूब खरीदा भी जा रहा है. जानिए कुछ ऐसी Cryptocurrency के बारे में.

बिटकॉइन(Bitcoin): दुनिया की सबसे पहले बनाई जाने वाली Cryptocurrency या डिजिटल करेंसी की बात करें तो वो बिटकॉइन है. बिटकॉइन Cryptocurrency की खोज साल 2009 में की गई थी. आपको बता दें, इस करेंसी की खोज एक जापान के निवासी द्वारा की गई थी, जिसका नाम Satoshi Nakamoto बताया जाता है. इस वक्त 1 बिटकॉइन की कीमत भारतीय रुपए के अनुसार लगभग 33,85,337.29 रुपए है.

लाइटक्वाइन (Litecoin): लाइटक्वाइन एक तरह की Cryptocurrency है. आपको बता दें, कि इसे Charles Li द्वारा बनाया गया है. वहीं इस मुद्रा का चिह्न LTC है. इस क्रिप्टोकरेंसी को साल 2011 में बाजार में उतारा गया था. इस वक्त एक 1 LTC की कीमत भारतीय रुपए के अनुसार करीब 13,296.75 रुपए है.

इथेरियम (Ethereum): इथेरियम को 2015 में शुरू किया गया था. इस मुद्रा को Vitalik Buterin द्वारा बनाया गया है. आपको बता दें, कि साल 2016 में इथेरियम दो भागों में बाँट दिया था. जिसमें से एक भाग इथेरियम के नाम से जाना जाता है, और एक इथेरियम क्लासिक के नाम से. इथेरियम Cryptocurrency का चिह्न ETH है. वहीं इस मुद्रा के मूल्य की बात करें तो 1 ETH का भारतीय मूल्य 2,46,के लिए 2023 बढ़ती क्रिप्टोकरेंसी 788.32 रुपए है.

इथेरियम क्लासिक क्रिप्टोकरेंसी का चिह्न ETC है. भारतीय रुपए की कीमत के हिसाब से एक ETC की कीमत 531.69 रुपए है. इस मुद्रा से जुड़ी एक ethereumclassic.github.io वेबसाइट भी है जहां पर आपको इससे जुड़ी कई सारी जानकारी मिल जाएंगी.

रिपल (Ripple): साल 2012 से शुरू हुई रिपल करेंसी को XRP चिह्न से जाना जाता है. इस Cryptocurrency को Chris Larsen और Jed McCaleb द्वारा बनाया गया है. वहीं इस Cryptocurrency की कीमत की बात करें, तो एक XRP की भारतीय रुपए में कीमत केवल 83.39 रुपए की है.

बिटकॉइन कैश (बीसीएच): बिटकॉइन कैश का निशान BCH है. 1 BCH Cryptocurrency की कीमत भारतीय रुपए के हिसाब से 45,784.33 रुपए है. इस करेंसी को अगस्त, 2017 को शुरू किया गया है.

मॉनिरो (Monero): मॉनिरो भी एक तरह की Cryptocurrency है, जिसको XMR चिह्न से जाना जाता है. इस मुद्रा को 2014 में बाजार में लाया गया था. मॉनिरो को Monero Core द्वारा बनाया गया है. वहीं 1 XMR की कीमत इस समय भारत में 19,344.91 रुपए है.

एनईएम (NEM): इस Cryptocurrency को 2014 में शुरू किया गया था. इसकी एक वेबसाइट भी है जो कि https://nem.io/ है. वहीं इस मुद्रा का चिन्ह XEM है. भारत में इस समय एक XEM की कीमत महज 25.67 रुपए है.

डैश (DASH): इस Cryptocurrency को 2014 में बाजार में लाया गया है. डैश को बनाने के पीछे Ivan Dafield और Kyle Hagan की मेहनत जुड़ी हुई है. वहीं इस Cryptocurrency को DASH का चिह्न दिया गया है. 1 DASH भारतीय रुपए के हिसाब से 14,878.81 रुपए के बराबर है.

भारत में Cryptocurrency को कानूनी रुप से मान्यता प्राप्त नहीं है. यद्यपि आप अभी भी क्रिप्टो एक्सचेंजों के माध्यम से Cryptocurrency खरीद सकते हैं.अभी कोई आधिकारिक नियामक ढांचा नहीं होने कि वजह से क्रिप्टो इनोवेशन पर रोक है. अप्रैल 2018 में, RBI ने बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को Cryptocurrency लेनदेन का समर्थन करने से प्रतिबंधित कर दिया. हालाँकि, मार्च 2020 में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने असंवैधानिक होने के आधार पर प्रतिबंध को हटा दिया.

क्रिप्टोकरेंसी पर भारत की रणनीति

हाल ही में, क्रिप्टोकरेंसी के मूल्य में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। बिटकॉइन ने 20,000 अमेरिकी डॉलर के मूल्य को पार कर लिया है। क्रिप्टोकरेंसी के मूल्य में हुई इस वृद्धि से भारत में भी इसके प्रचलन व वैधता से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर पुनर्विचार की माँग उठने लगी है।

क्रिप्टोकरेंसी : अवधारणा

  • क्रिप्टोकरेंसी कम्प्यूटराइज़्ड डाटाबेस पर संग्रहीत एक डिजिटल मुद्रा है। सुरक्षा की दृष्टि से इसे मज़बूत क्रिप्टोग्राफ़ी के उपयोग द्वारा डिजिटल बही-खातों में रिकॉर्ड किया जाता है। ये बही-खातें विश्व स्तर पर क्रिप्टोकरेंसी के उपयोगकर्ताओं के लिये वितरित होते हैं।
  • क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से किये गए प्रत्येक लेन-देन को ब्लॉक (Blocks) के रूप में कूटबद्ध किया जाता है। कई ब्लॉक एक-दूसरे से मिलकर वितरित बही-खाते (Distributed Ledger) पर ब्लॉकचेन का निर्माण करते हैं।
  • क्रिप्टोकरेंसी में इनक्रिप्शन एल्गोरिद्म (Encryption algorithms) के रूप में भी अतिरिक्त सुरक्षा होती है। क्रिप्टोग्राफ़िक अथवा कूटबद्ध (Coded) विधियों का उपयोग मुद्रा के साथ-साथ उस नेटवर्क को भी सुरक्षित बनाने के लिये किया जाता है, जिस पर इसका कारोबार किया जा रहा है।
  • वर्तमान में, विश्व भर में लगभग 1500 से अधिक क्रिप्टोकरेंसी प्रचलन में हैं। फेसबुक द्वारा घोषित ‘लिब्रा’ के अतिरिक्त बिटकॉइन, एथरियम आदि क्रिप्टोकरेंसी के कुछ अन्य उदाहरण हैं।

क्रिप्टोकरेंसी के लाभ

  • डिजिटल मुद्रा होने के कारण क्रिप्टोकरेंसी का सबसे बड़ा लाभ इसकी गोपनीयता है। इसी कारण इसके लेन-देन में किसी प्रपत्र की अनिवार्यता नहीं है और न ही इसके लिये निजी जानकारी अथवा पहचान साझा करने की आवश्यकता होती है।
  • क्रिप्टोकरेंसी का विनियमन किसी भी संस्था द्वारा नही किया जाता, जिस कारण इसका लेन-देन आसन होता है। इसके लिये किसी मध्यस्थ की भी आवश्यकता नहीं होती और न ही इसके लिये अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है।
  • डिजिटल मुद्रा होने के कारण इसमें किसी प्रकार की धोखाधड़ी होने की सम्भावना बहुत कम होती है। साथ ही, क्रिप्टोकरेंसी पर वैश्विक मंदी, अवमूल्यन एवं नोटबंदी का भी कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

क्रिप्टोकरेंसी की चुनौतियाँ

  • किसी वैध संस्था द्वारा विनियमन न होने से इसके मूल्य में भारी उतार-चढ़ाव के कारण अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है।
  • गोपनीयता के कारण आतंकी अथवा ग़ैर-क़ानूनी गतिविधियों में इसका दुरुपयोग होने की संभावना अधिक है।
  • इस मुद्रा पर केंद्रीय बैंक के लिए 2023 बढ़ती क्रिप्टोकरेंसी का कोई नियंत्रण नहीं होता है, जिस कारण इस पर मौद्रिक नीतियों का कोई प्रभाव नही पड़ेगा।
  • बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ इसके माध्यम से वित्तीय लेन-देन करके ‘कर अपवंचना’ को बढ़ावा दे सकती हैं।

भारत में क्रिप्टोकरेंसी की स्थिति

  • वित्तीय वर्ष 2018-19 में भारत सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी को लीगल टेंडर के रूप में मान्यता प्रदान करने से इंकार करते हुए कहा था कि सरकार अवैध गतिविधियों के वित्तपोषण और भुगतान प्रणाली में इसके उपयोग को रोकने के लिये आवश्यक उपाय करेगी।
  • नवंबर 2017 में गठित एक अंतर-मंत्रालयी समिति की रिपोर्ट के आधार पर जुलाई 2019 में प्रस्तुत ‘क्रिप्टोकरेंसी प्रतिबंध एवं आधिकारिक डिजिटल मुद्रा विनियमन विधेयक, 2019’ के फ्रेमवर्क में सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी को पूर्ण रूप से प्रतिबंधित करने की मांग की थी।
  • साथ ही, समिति ने क्रिप्टोकरेंसी के महत्त्व को देखते हुए रिज़र्व बैंक को भविष्य में स्वयं की डिजिटल करेंसी जारी करने का सुझाव दिया था।
  • इसी संदर्भ में भारतीय रिज़र्व बैंक ने क्रिप्टोकरेंसी में पारदर्शिता के अभाव तथा इसकी अस्थिर प्रकृति को देखते हुए अप्रैल 2018 में सभी वित्तीय संस्थानों में क्रिप्टोकरेंसी के किसी भी प्रकार के वित्तीय लेन-देन को प्रतिबंधित कर दिया था।
  • हालाँकि बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने रिज़र्व बैंक द्वारा लगाए गए इन प्रतिबंध को ख़ारिज करते हुए कहा था कि क्रिप्टोकरेंसी प्रकृति में एक ‘वस्तु/कमोडिटी’ है। अतः इसे प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता।

क्या होनी चाहिये आगे की राह ?

  • वर्तमान में, भारत में क्रिप्टोकरेंसी को अपनाने को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किये गए हैं और सरकार अभी भी असमंजस की स्थिति में है।
  • सरकार मुद्रा-ब्लॉकचेन से संबंधित प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रही है। चूँकि क्रिप्टोकरेंसी भी इसी प्रौद्योगिकी से संबंधित है, अतः भविष्य में सरकार इसे वैधता प्रदान करने पर विचार कर सकती है।
  • ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी और क्रिप्टोकरेंसी परस्पर जुड़े हुए हैं। चीन ने अपने यहाँ क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज्स की अनुमति प्रदान की थी, जिस कारण आज चीन में सर्वाधिक ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी आधारित स्टार्टअप्स हैं।
  • सरकार आधुनिक डिजिटल उपकरणों के माध्यम से किसी की पहचान की पुष्टि कर सकती है। ऐसे में क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से व्यापर पर के लिए 2023 बढ़ती क्रिप्टोकरेंसी प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है।
  • वर्तमान में ऑनलाइन गेमिंग एक उभरता हुआ क्षेत्र है जो मुख्य रूप से डिजिटल मुद्रा पर ही आधारित है। अतः इसके लिये एक आसान भुगतान प्रणाली की आवश्कता है जिसे क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से पूरा किया जा सकता है।
  • सरकार को क्रिप्टोकरेंसी के बाज़ार पर एकाधिकार के मुद्दे पर भी विचार करना चाहिये। क्रिप्टोकरेंसी को प्रतिबंधित करके सरकार बड़ी कंपनियों को इसमें संपत्ति अर्जित करने का अवसर दे रही है। चूँकि क्रिप्टोकरेंसी के बढ़ते बाज़ार के कारण इसे लंबे समय तक प्रतिबंधित नहीं रखा जा सकता, ऐसे में प्रतिबंध समाप्त होने पर सरकार के लिये इसे विनियमित करना आसान नहीं होगा।
  • फेसबुक ‘लिब्रा’ के माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी के बाज़ार में उतर चुकी है। ऐसे में भारत के पास भी एक अवसर है कि वह इसमें भागीदार बनकर क्रिप्टोकरेंसी के बाज़ार को समझे, क्योंकि बिना बाज़ार को समझे नियामक की भूमिका निभाना भी आसान नहीं होगा।
  • सरकार क्रिप्टोकरेंसी को वैध मुद्रा के रूप में मान्यता न देकर इसे व्यापार-योग्य वस्तु घोषित कर सकती है और कर की प्रयोज्यता के संदर्भ में स्पष्टीकरण दे सकती है।
  • इसके अतिरिक्त, महामारी-प्रेरित लॉकडाउन के कारण अनेक उद्योग-धंधे मंदी का सामना कर रहे हैं। ऐसे में क्रिप्टोकरेंसी और ब्लॉकचेन आधारित प्रौद्योगिकी इस क्षेत्र में रोज़गार सृजन में सहायक सिद्ध हो सकती हैं। साथ ही, यह $ 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी मददगार साबित होगा।
  • वैश्विक स्तर पर क्रिप्टोकरेंसी के बढ़ते प्रचलन को देखते हुए माना जा रहा है कि सरकार आगामी बजट में क्रिप्टोकरेंसी को अपनाने की दिशा सकारात्मक कदम उठा सकती है ।

निष्कर्ष

वर्तमान में क्रिप्टोकरेंसी का महत्त्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार को चाहिये कि वह इस पर स्पष्ट कानून बनाकर इसे विनियमित करे। इसके लिये मौजूदा ‘फेमा’ (FEMA) तथा सेबी के कानूनों में संशोधन कर धन के प्रवाह व पूंजी जुटाने संबंधी विकल्पों को विनियमित किया जा सकता है। इसी प्रकार, कर की प्रयोज्यता पर स्पष्टता लाने के लिये आयकर और जी.एस.टी. कानूनों में संशोधन किये जा सकते हैं। अतः अर्थव्यवस्था में सुरक्षा, अवसर और संवृद्धि तभी बढ़ेंगे जब वह नए समाधानों को स्वीकार करेगी।

क्रिप्टोकरेंसी पर भारत की रणनीति

हाल ही में, क्रिप्टोकरेंसी के मूल्य में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। बिटकॉइन ने 20,000 अमेरिकी डॉलर के मूल्य को पार कर लिया है। क्रिप्टोकरेंसी के मूल्य में हुई इस वृद्धि से भारत में भी इसके प्रचलन व वैधता से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर पुनर्विचार की माँग उठने लगी है।

क्रिप्टोकरेंसी : अवधारणा

  • क्रिप्टोकरेंसी कम्प्यूटराइज़्ड डाटाबेस पर संग्रहीत एक डिजिटल मुद्रा है। सुरक्षा की दृष्टि से इसे मज़बूत क्रिप्टोग्राफ़ी के उपयोग द्वारा डिजिटल बही-खातों में रिकॉर्ड किया जाता है। ये बही-खातें विश्व स्तर पर क्रिप्टोकरेंसी के उपयोगकर्ताओं के लिये वितरित होते हैं।
  • क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से किये गए प्रत्येक लेन-देन को ब्लॉक (Blocks) के रूप में कूटबद्ध किया जाता है। कई ब्लॉक एक-दूसरे से मिलकर वितरित बही-खाते (Distributed Ledger) पर ब्लॉकचेन का निर्माण करते हैं।
  • क्रिप्टोकरेंसी में इनक्रिप्शन एल्गोरिद्म (Encryption algorithms) के रूप में भी अतिरिक्त सुरक्षा होती है। क्रिप्टोग्राफ़िक अथवा कूटबद्ध (Coded) विधियों का उपयोग मुद्रा के साथ-साथ उस नेटवर्क को भी सुरक्षित बनाने के लिये किया जाता है, जिस पर इसका कारोबार किया जा रहा है।
  • वर्तमान में, विश्व भर में लगभग 1500 से अधिक क्रिप्टोकरेंसी प्रचलन में हैं। फेसबुक द्वारा घोषित ‘लिब्रा’ के अतिरिक्त बिटकॉइन, एथरियम आदि क्रिप्टोकरेंसी के कुछ अन्य उदाहरण हैं।

क्रिप्टोकरेंसी के लाभ

  • डिजिटल मुद्रा होने के कारण क्रिप्टोकरेंसी का सबसे बड़ा लाभ इसकी गोपनीयता है। इसी कारण इसके लेन-देन में किसी प्रपत्र की अनिवार्यता नहीं है और न ही इसके लिये निजी जानकारी अथवा पहचान साझा करने की आवश्यकता होती है।
  • क्रिप्टोकरेंसी का विनियमन किसी भी संस्था द्वारा नही किया जाता, जिस कारण इसका लेन-देन आसन होता है। इसके लिये किसी मध्यस्थ की भी आवश्यकता नहीं होती और न ही इसके लिये अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है।
  • डिजिटल मुद्रा होने के कारण इसमें किसी प्रकार की धोखाधड़ी होने की सम्भावना बहुत कम होती है। साथ ही, क्रिप्टोकरेंसी पर वैश्विक मंदी, अवमूल्यन एवं नोटबंदी का भी कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

क्रिप्टोकरेंसी की चुनौतियाँ

  • किसी वैध संस्था द्वारा विनियमन न होने से इसके मूल्य में भारी उतार-चढ़ाव के कारण अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है।
  • गोपनीयता के कारण आतंकी अथवा ग़ैर-क़ानूनी गतिविधियों में इसका दुरुपयोग होने की संभावना अधिक है।
  • इस मुद्रा पर केंद्रीय बैंक का कोई नियंत्रण नहीं होता है, जिस कारण इस पर मौद्रिक नीतियों का कोई प्रभाव नही पड़ेगा।
  • बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ इसके माध्यम से वित्तीय लेन-देन करके ‘कर अपवंचना’ को बढ़ावा दे सकती हैं।

भारत में क्रिप्टोकरेंसी की स्थिति

  • वित्तीय वर्ष 2018-19 में भारत सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी को लीगल टेंडर के रूप में मान्यता प्रदान करने से इंकार करते हुए कहा था कि सरकार अवैध गतिविधियों के वित्तपोषण और भुगतान प्रणाली में इसके उपयोग को रोकने के लिये आवश्यक उपाय करेगी।
  • नवंबर 2017 में गठित एक अंतर-मंत्रालयी समिति की रिपोर्ट के आधार पर जुलाई 2019 में प्रस्तुत ‘क्रिप्टोकरेंसी प्रतिबंध एवं आधिकारिक डिजिटल मुद्रा विनियमन विधेयक, 2019’ के फ्रेमवर्क में सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी को पूर्ण रूप से प्रतिबंधित करने की मांग की थी।
  • साथ ही, समिति ने क्रिप्टोकरेंसी के महत्त्व को देखते हुए रिज़र्व बैंक को भविष्य में स्वयं की डिजिटल करेंसी जारी करने का सुझाव दिया था।
  • इसी संदर्भ में भारतीय रिज़र्व बैंक ने क्रिप्टोकरेंसी में पारदर्शिता के अभाव तथा इसकी अस्थिर प्रकृति को देखते हुए अप्रैल 2018 में सभी वित्तीय संस्थानों में क्रिप्टोकरेंसी के किसी भी प्रकार के वित्तीय लेन-देन को प्रतिबंधित कर दिया था।
  • हालाँकि बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने रिज़र्व बैंक द्वारा लगाए गए इन प्रतिबंध को ख़ारिज करते हुए कहा था कि क्रिप्टोकरेंसी प्रकृति में एक ‘वस्तु/कमोडिटी’ है। अतः इसे प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता।

क्या होनी चाहिये आगे की राह ?

  • वर्तमान में, भारत में क्रिप्टोकरेंसी को अपनाने को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किये गए हैं और सरकार अभी भी असमंजस की के लिए 2023 बढ़ती क्रिप्टोकरेंसी स्थिति में है।
  • सरकार मुद्रा-ब्लॉकचेन से संबंधित प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रही है। चूँकि क्रिप्टोकरेंसी भी इसी प्रौद्योगिकी से संबंधित है, अतः भविष्य में सरकार इसे वैधता प्रदान करने पर विचार कर सकती है।
  • ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी और क्रिप्टोकरेंसी परस्पर जुड़े हुए हैं। चीन ने अपने यहाँ क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज्स की अनुमति प्रदान की थी, जिस कारण आज चीन में सर्वाधिक ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी आधारित स्टार्टअप्स हैं।
  • सरकार आधुनिक डिजिटल उपकरणों के माध्यम से किसी की पहचान की पुष्टि कर सकती है। ऐसे में क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से व्यापर पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है।
  • वर्तमान में ऑनलाइन गेमिंग एक उभरता हुआ क्षेत्र है जो मुख्य रूप से डिजिटल मुद्रा पर ही आधारित है। अतः इसके लिये एक आसान भुगतान प्रणाली की आवश्कता है जिसे क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से पूरा किया जा सकता है।
  • सरकार को क्रिप्टोकरेंसी के बाज़ार पर एकाधिकार के मुद्दे पर भी विचार करना चाहिये। क्रिप्टोकरेंसी को प्रतिबंधित करके सरकार बड़ी कंपनियों को इसमें संपत्ति अर्जित करने का अवसर दे रही है। चूँकि क्रिप्टोकरेंसी के बढ़ते बाज़ार के कारण इसे लंबे समय तक प्रतिबंधित नहीं रखा जा सकता, ऐसे में प्रतिबंध समाप्त होने पर सरकार के लिये इसे विनियमित करना आसान नहीं होगा।
  • फेसबुक ‘लिब्रा’ के माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी के बाज़ार में उतर चुकी है। ऐसे में भारत के पास भी एक अवसर है कि वह इसमें भागीदार बनकर क्रिप्टोकरेंसी के बाज़ार को समझे, क्योंकि बिना बाज़ार को समझे नियामक की भूमिका निभाना भी आसान नहीं होगा।
  • सरकार क्रिप्टोकरेंसी को वैध मुद्रा के रूप में मान्यता न देकर इसे व्यापार-योग्य वस्तु घोषित कर सकती है और कर की प्रयोज्यता के संदर्भ में स्पष्टीकरण दे सकती है।
  • इसके अतिरिक्त, महामारी-प्रेरित लॉकडाउन के कारण अनेक उद्योग-धंधे मंदी का सामना कर रहे हैं। ऐसे में क्रिप्टोकरेंसी और ब्लॉकचेन आधारित प्रौद्योगिकी इस क्षेत्र में रोज़गार सृजन में सहायक सिद्ध हो सकती हैं। साथ ही, यह $ 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी मददगार साबित होगा।
  • वैश्विक स्तर पर क्रिप्टोकरेंसी के बढ़ते प्रचलन को देखते हुए माना जा रहा है कि सरकार आगामी बजट में क्रिप्टोकरेंसी को अपनाने की दिशा सकारात्मक कदम उठा सकती है ।

निष्कर्ष

वर्तमान में क्रिप्टोकरेंसी का महत्त्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार को चाहिये कि वह इस पर स्पष्ट के लिए 2023 बढ़ती क्रिप्टोकरेंसी कानून बनाकर इसे विनियमित करे। इसके लिये मौजूदा ‘फेमा’ (FEMA) तथा सेबी के कानूनों में संशोधन कर धन के प्रवाह व पूंजी जुटाने संबंधी विकल्पों को विनियमित किया जा सकता है। इसी प्रकार, कर की प्रयोज्यता पर स्पष्टता लाने के लिये आयकर और जी.एस.टी. कानूनों में संशोधन किये जा सकते हैं। अतः अर्थव्यवस्था में सुरक्षा, अवसर और संवृद्धि तभी बढ़ेंगे जब वह नए समाधानों को स्वीकार करेगी।

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