वायदा व्यापार

बाजार प्लेटफार्मों के प्रकार

बाजार प्लेटफार्मों के प्रकार
दरअसल प्रधानमंत्री आने वाले वर्षों में कृषि उपजों की संभावित मांग को देखते हुए आजादी की 75वीं सालगिरह तक खाद्यान्‍न उत्‍पादन दोगुना कर दुनिया के बाजार पर भारतीय खाद्य उत्पादों का कब्ज़ा जमा देना चाहते हैं। लेकिन यह तभी संभव होगा जब खेती-किसानी फायदे का सौदा बने। इसीलिए प्रधानमंत्री ने फसल बीमा के बाद राष्‍ट्रीय कृषि बाजार, वर्चुअल व डिजिटल प्‍लेटफार्म शुरू करने की घोषणा की है। कृषि प्‍लेटफार्म के तहत सरकार देश की सभी 585 थोक मंडियों को 2018 तक चरणबद्ध तरीके से एकीकरण कर देगी। इससे किसानों को देश की संभी मंडियों के भाव ऑनलाइन और मोबाइल पर मिलने लगेंगे और वे देश की किसी भी मंडी में अपनी उपज बेचने के लिए स्‍वतंत्र होंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कृषि उपजों की खरीद-बिक्री पर प्रभुत्‍व जमाए आढ़तियों-बिचौलियों की भूमिका खत्‍म हो जाएगी।

बाजार में जल्दी आ सकती है Tata New Sumo, यहां जानें इसके ख़ास फीचर्स

टाटा कंपनी अब उन 3 एसयूवी के बारे में गहनता से विचार कर रही है। जिनको भारतीय लोग बाजार में फिर से देखना चाहते हैं। इनमें टाटा सिएरा, टाटा सफारी और टाटा सूमो शामिल है। इनमें से टाटा सिएरा के बारे में कहा जा रहा है कि यह इलेक्ट्रिक अवतार में बाजार में आएगी। इसके अलावा टाटा सफारी टाटा हैक्सा वेरिएंट के रूप में अपनी पहचान कायम रखेगी। टाटा सूमो के बारे में अभी कोई खबर सामने नहीं आई है। हालही में टाटा सूमो की एक नई छवि प्रस्तुत हुई थी। इस कारण लोगों के जहन में एक सवाल फिर से घुमड़ रहा है कि “क्या टाटा सूमो फिर से भारत में वापसी करेगी या नहीं।”

असल में एक तस्वीर हालही में काफी वायरल हो रही है। जिसमें टाटा सूमो को नए मॉडल के साथ दिखाया गया है। हालांकि यह डिजाइन इस बात का सबूत नहीं है कि इसको टाटा मोटर्स ने बनाया है। इसके अलावा तस्वीर को देखकर सीधे बाजार प्लेटफार्मों के प्रकार बाजार प्लेटफार्मों के प्रकार तौर पर यह नहीं कहा जा सकता है कि आने वाली टाटा सूमो कार इस प्रकार की दिखेगी। तस्वीर में जिस टाटा सुमो के नए मॉडल को दिखाया गया है। वह लोगों का ध्यान तेजी से अपनी ओर खींच रहा है। इस तस्वीर को देखने पर पता लगता है कि इसके डिजाइन में कई चीजें ग्रेविटास और टाटा हैरियर से ली गई हैं।

टाटा सूमो X2 में थे ये फीचर्स

आपको बता दें कि टाटा सूमो X2 प्लेटफार्म आधारित थी। इस प्रकार के प्लेटफार्म का उपयोग टाटा सिएरा और टाटा एस्टेट में भी किया गया था। X2 प्लेटफॉर्म फ्रेम प्लेटफॉर्म पर बॉडी था। इसने कार को एक अच्छा ग्राउंड क्लीयरेंस दिया और इसे खराब सड़क की स्थिति के लिए उपयुक्त बना दिया। यह एक रियर-व्हील-ड्राइव वाहन था। इसमें ट्रक की तरह सस्पेंशन भी थे तथा पीछे की ओर लीफ स्प्रिंग सस्पेंशन भी दिया हुआ था।

क्या लांच होगी नई टाटा सूमो

नई टाटा सूमो के बारे में कंपनी की ओर से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसके साथ ही इस बात की भी कोई खबर नहीं है कि टाटा मोटर्स इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। यदि आप रेंडर किए गए डिज़ाइन के बारे में विचार कर रहें हैं तो इसको ग्राफिक डिज़ाइनिंग की मदद से भी बनाया जा सकता है। लेकिन हमें सूमो के इलेक्ट्रिक एसयूवी के नए वेरिएंट में आने की संभावना से इंकार नहीं करना चाहिए।

Share Market में अलग अलग रंगों का महत्व

Share Market में अलग अलग रंगों का महत्व और उनके अर्थ, कभी शेयर की कीमत या बाजार का सुचकांक लाल में दिखाया जाता है और कभी हरे रंग में। कभी किसी शेयर को ब्ल्यू चिप बोलते हैं तो कभी बोलते हैं कि शेयर पिंक हैल्थ में है। आपको भी यदि समझ नहीं आता कि शेयर मार्केट में अलग अलग रंगों का महत्व क्या है और इनके प्रायोग का तात्पर्य क्या है तो आज हम इसी पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

शेयर मार्केट में अलग अलग रंगों का महत्व

शेयर मार्केट में अलग अलग रंगों का महत्व

Share Market में अलग अलग रंगों का महत्व

हमारे जीवन को रंग ही मजेदार बनाते हैं। शेयर ट्रेडिंग की स्क्रीन पर भी ऐसे ही रंग बिखरे रहते हैं। आपने भी टीवी पर शेयर बाजार के समाचारों में देखा होगा शेयरों की कीमतें लाल और हरे तीरों से चिन्हित की होतीं हैं। या कई बार सुना होगा, निफ्टी लहु लुहान हो गया या सेंसेक्स हरे में बंद हुआ। इसी प्रकार शेयर बाजार के टिकर पर भी शेयरों की कीमतों को लाल और हरे रंग से दर्शाया जाता है।यहां पढ़ें किस कंपनी का शेयर खरीदें हमारी साइट पर।

Share Market में अलग अलग रंगों का महत्व – लाल और हरा रंग

हरा रंग खुशी और समृद्धी का प्रतीक है और लाल रंग क्रोध का।

शेयर बाजार में लाल और हरा

शेयर बाजार में लाल और हरा

शेयर की कीमत हरे रंग में दिखे तो इसका मतलब है कि शेयर पिछले दिन की क्लोजिंग के मुकाबले बढ़ कर खुला है या पिछली ट्रेडिंग के मुकाबले बढ़ कर ट्रेड हुआ है। ऐसे ही जब शेयर गिरता है तो लाल रंग में दिखाया जाता है। आम तौर पर, जब हम समाचार या अन्य प्लेटफार्मों में शेयर कीमतों को देखते हैं तो हम इन हरे और लाल टिकर्स को संख्याओं के साथ देखेंगे। संख्याएं उस विशेष स्टॉक के वर्तमान शेयर मूल्य का प्रतिनिधित्व करती हैं। इन शेयर कीमतों का रंग हरा या लाल इंगित करता है कि शेयर में पिछले सौदे के बाद मूल्य में कीमत में वृद्धि या कमी आई है। तो यदि कीमत ग्रीन है तो शेयर की कीमत बढ़ी है और यदि लाल है तो शेयर की कीमत घट गई है।

Share Market की पिंक हेल्थ

इसी प्रकार किसी कंपनी के बारे में कहा जाता है कि वह पिंक हेल्थ में है तो इसका मतलब है कि कंपनी के नतीजे अच्छे आये हैं और कंपनी की आर्थिक हालत अच्छी है। गुलाबी अक्सर सकारात्मक दृष्टिकोण इंगित करता है या एक भावना का प्रतीक है कि आशावादी होने का एक अच्छा कारण है। जब वित्तीय संदर्भ में उपयोग किया जाता है, तो यह वाक्यांश सकारात्मक, आकर्षक स्थिति या मूल्य स्थिति को इंगित करता है। यहां पढ़ें FMCG शेयर क्या होते हैं।

ब्लू चिप स्टॉक और स्वस्थ अर्थव्यवस्थाएं पिंक या रोज़ी वित्तीय स्थितियों के उदाहरण हैं। इस शब्द का अक्सर प्रयोग किया जाता है जब आर्थिक स्थितियां सुधार के संकेत दिखाती हैं, या जब अर्थव्यवस्था जल्दी से ग्रोथ की स्थिति में आगे बढ़ रही है। पिंक अर्थव्यवस्थाएं बदले में यह ब्लू-चिप कंपनियों को बढ़ावा देती हैं।

Share Market में ब्लू चिप स्टॉक

ब्लू चिप एक राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त, अच्छी तरह से स्थापित, और वित्तीय रूप से अच्छी कंपनी को कहते है। ब्लू चिप कंपनियां आमतौर पर उच्च गुणवत्ता वाले, व्यापक रूप से स्वीकृत उत्पादों और सेवाओं को बेचतीं हैं। ब्लू चिप कंपनियां प्रतिकूल आर्थिक परिस्थितियों में भी लाभप्रद परिचालन करती हैं, जो स्थिर और विश्वसनीय विकास के अपने लंबे रिकॉर्ड में योगदान करने में मदद करती है।

“ब्लू चिप” नाम पोकर के खेल से आया था जिसमें ब्लू चिप्स की गोटी का उच्चतम मूल्य होता है।

मोदी सरकार के इन कदमों से खेती बनेगी मुनाफे का सौदा, किसानों के आएंगे अच्छे दिन!

भारतीय खेती की सबसे बड़ी त्रासदी यही है कि कुदरत का प्रकोप हो या मेहरबानी दोनों ही दशाओं में किसान बदहाल रहता है। लेकिन अब यह स्‍थिति ज्‍यादा दिन रहने वाली नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फसल बीमा से लेकर उपज की बिक्री तक बाजार प्लेटफार्मों के प्रकार का मुकम्‍मल उपाय करने में जुट गए हैं। दरअसल प्रधानमंत्री आने वाले वर्षों में कृषि उपजों की संभावित मांग को देखते हुए आजादी की 75वीं सालगिरह तक खाद्यान्‍न उत्‍पादन दोगुना कर दुनिया के बाजार पर भारतीय खाद्य उत्पादों का कब्ज़ा जमा देना चाहते हैं। लेकिन यह तभी संभव होगा जब खेती-किसानी फायदे का सौदा बने। इसीलिए प्रधानमंत्री ने फसल बीमा के बाद राष्‍ट्रीय कृषि बाजार, वर्चुअल व डिजिटल प्‍लेटफार्म शुरू करने की घोषणा की है। कृषि प्‍लेटफार्म के तहत सरकार देश की सभी 585 थोक मंडियों को 2018 तक चरणबद्ध तरीके से एकीकरण कर देगी। इससे किसानों को देश की संभी मंडियों के भाव ऑनलाइन और मोबाइल पर मिलने लगेंगे और वे देश की किसी भी मंडी में अपनी उपज बेचने के लिए स्‍वतंत्र होंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कृषि उपजों की खरीद-बिक्री पर प्रभुत्‍व जमाए आढ़तियों-बिचौलियों की भूमिका खत्‍म हो जाएगी।

खेती-किसानी की आउटसोर्सिंग ने 2007-08 में जोर पकड़ा जब अप्रत्‍याशित रूप से बढ़ी हुई कीमतों के कारण दुनिया के 37 देशों में खाद्य दंगे भड़क उठे थे। इसी मौके का फायदा उठाने के लिए निजी कपनियों, सट्टेबाजों और निवेश बैंकों ने “भूमि हड़प” के फार्मूले पर काम करना शुरू बाजार प्लेटफार्मों के प्रकार किया जिसका नतीजा यह है कि छोटे व सीमांत किसान तेजी से भूमिहीन श्रमिक बन रहे हैं। यह भारत में ही नहीं बल्‍कि पूरी दुनिया में हो रहा है। आज यूरोप में तमाम तरह की सब्‍सिडी के बावजूद हर मिनट में एक किसान खेती-किसानी को अलविदा कह रहा है। भारत में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है।

दरअसल प्रधानमंत्री आने वाले वर्षों में कृषि उपजों की संभावित मांग को देखते हुए आजादी की 75वीं सालगिरह तक खाद्यान्‍न उत्‍पादन दोगुना कर दुनिया के बाजार पर भारतीय खाद्य उत्पादों का कब्ज़ा जमा देना चाहते हैं। लेकिन यह तभी संभव होगा जब खेती-किसानी फायदे का सौदा बने। इसीलिए प्रधानमंत्री ने फसल बीमा के बाद राष्‍ट्रीय कृषि बाजार, वर्चुअल व डिजिटल प्‍लेटफार्म शुरू करने की घोषणा की है। कृषि प्‍लेटफार्म के तहत सरकार देश की सभी 585 थोक मंडियों को 2018 तक चरणबद्ध तरीके से एकीकरण कर देगी। इससे किसानों को देश की संभी मंडियों के भाव ऑनलाइन और मोबाइल पर मिलने लगेंगे और वे देश की किसी भी मंडी में अपनी उपज बेचने के लिए स्‍वतंत्र होंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कृषि उपजों की खरीद-बिक्री पर प्रभुत्‍व जमाए आढ़तियों-बिचौलियों की भूमिका खत्‍म हो जाएगी।

इन समस्याओं के समाधान के मद्देनज़र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दूर की सोच रहे हैं। खेती-किसानी को फायदे का सौदा बनाने से न केवल देश का समावेशी विकास होगा बल्‍कि कृषि उपजों के राष्‍ट्रीय-अंतरराष्‍ट्रीय बाजार पर आसानी से कब्‍जा भी जमाया जा सकेगा। इससे उन आलोचकों को भी जवाब मिल गया है जो मोदी सरकार पर कार्पोरेट घराने के लिए काम कराने का आरोप लगाते रहे हैं। गौरतलब है कि जहां एक ओर उदारीकरण समर्थक किसानों के खेती छोड़ने को विकास प्रक्रिया का अभिन्‍न अंग बताते हैं, वहीं कई वैश्‍विक संस्‍थाओं का मानना है कि विकासशील देशों के करोड़ों ग्रामीणों का कल्‍याण कृषि क्षेत्र के विकास के बिना संभव नहीं है। विश्‍व बैंक के मुताबिक गरीब लोगों के लिए कृषि क्षेत्र के सकल घरेलू उत्‍पाद में बढ़ोत्‍तरी अन्‍य क्षेत्रों में निवेश के मुकाबले चार गुना अधिक कारगर है।

1-1447503354

पूर्वी एशियाई देशों में पिछले 15 वर्षों में कृषि क्षेत्र का विकास गरीबी दूर करने में सहायक सिद्ध हुआ है। भारत के 85 फीसदी किसान छोटी जोत वाले हैं और अनुभवों से यह प्रमाणित हो चुका है कि छोटे किसानों की सहायता से आर्थिक विकास के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा भी सुनिश्‍चित होती है। यहां वियतनाम का उदाहरण प्रासंगिक है। 1979 में यहां की 58 फीसदी जनसंख्‍या गरीबी की रेखा के नीचे गुजर बसर कर रही थी, 2009 में यह अनुपात घट कर मात्र 15 फीसदी रह गया। इस उपलब्‍धि को वियतनाम ने अपने छोटे किसानों के बल पर हासिल किया है। गौरतलब है कि आज भी वियतनाम की 73 फीसदी जनसंख्‍या ग्रामीण इलाकों में रहती है और कृषि आय का प्रमुख साधन है।

उपर्युक्त प्रकार से स्‍पष्‍ट है कि भारत की छोटी जोतों में वैश्‍विक खाद्यान्‍न आपूर्ति में महत्‍वपूर्ण योगदान देने की क्षमता है। लेकिन यह तभी संभव होगा जब किसानों की भूमि, पानी, बीज, उर्वरक, कीटनाशक, मशीनरी तक पहुंच बने और स्‍थानीय स्‍तर पर वित्‍तीय सुविधाएं सुलभ हों। इसके अलावा परिवहन के साधनों के साथ-साथ किसानों तक नवीनतम तकनीक पहुंचाई जाए। इसी प्रकार कृषि विपणन ढांचे में सुधार किया जाए ताकि किसानों को उपज का लाभकारी मूल्‍य मिल सके। सुखद यह है कि सरकार इस दिशा में दूरगामी सोच से युक्त होकर गंभीरतापूर्वक कदम बढ़ा रही है। इस दिशा में कई एक पहले की गई हैं, जिनका असर सामने आ रहा है और समय के साथ इनका पूरा प्रभाव जरूर दिखाई देगा।

(लेखक केन्द्रीय सचिवालय में अधिकारी हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

पशु पालकों को बाजार उपलब्ध कराएगी सरकार

पशु पालकों को बाजार उपलब्ध कराएगी सरकार

डॉ. मिश्र जिला पंचायत सभागार में प्रगतिशील पशुपालक उद्यमी एवं संबंधित कंपनियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने पशुपालकों से कहा कि राज्य स्तरीय कार्यशाला के दौरान अपनी मांगों से सरकार को खुद अवगत कराएं। मुख्य चिकित्साधिकारी डी के शर्मा ने कहा कि इस तरह का पहला आयेाजन किया गया है जिसमें पशु उत्पादक, उसके रख-रखाव और उसके विपणन के लिए एक प्लेटफार्म पर सभी हित धारकों के बीच संवाद हो रहा है।

नवीन कुमार ने नाबार्ड की चल रही परियोजनाओं से सभी को अवगत कराया।
कहा कि वर्तमान में पशुपालन से संबंधित तथा पशु उत्पाद के लिए प्रयोग की जाने वाली विभिन्न प्रकार की मशीनों एवं उसके बिक्री के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाएं हैं। कई में तो महिलाओं और अनुसूचित जाति के लिए विशेष अनुदान दिया जा रहा है। एसबीआई के महेश कुमार गुप्ता ने केसीसी के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि पहली बार सरकार पशुपालकों के लिए केसीसी उपलब्ध करा रही है। कृषि के लिए जहां तीन लाख किसानों को मिलता है वहीं पशुपालकों को दो लाख दिया जा रहा है। यदि किसान पशुपालन के साथ कृषि पालन करता है तो उसे तीन लाख का ऋण मिल सकता है। कार्यक्रम में मंडल के सभी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एवं उप निदेशक पशुपालन, तथा लीड बैंक के मैनेजर उपस्थित थे।

नोट:आपको हमारी यह स्टोरी कैसी लगी इस पर अपना फीडबैक नीचे बने कमेंट बॉक्स में जरूर दें।

डॉ. मिश्र जिला पंचायत सभागार में प्रगतिशील पशुपालक उद्यमी एवं संबंधित कंपनियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने पशुपालकों से कहा कि राज्य स्तरीय कार्यशाला के दौरान अपनी मांगों से सरकार को खुद अवगत कराएं। मुख्य चिकित्साधिकारी डी के शर्मा ने कहा कि इस तरह का पहला आयेाजन किया गया है जिसमें पशु उत्पादक, उसके रख-रखाव और उसके विपणन के लिए एक प्लेटफार्म पर सभी हित धारकों के बीच संवाद हो रहा है।

नवीन कुमार ने नाबार्ड की चल रही परियोजनाओं से सभी को अवगत कराया।
कहा कि वर्तमान में पशुपालन से संबंधित तथा पशु उत्पाद के लिए प्रयोग की जाने वाली विभिन्न प्रकार की मशीनों एवं उसके बिक्री के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाएं हैं। कई में तो महिलाओं और अनुसूचित जाति के लिए विशेष अनुदान दिया जा रहा है। एसबीआई के महेश कुमार गुप्ता ने केसीसी के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि पहली बार सरकार पशुपालकों के लिए केसीसी उपलब्ध करा रही है। कृषि के लिए जहां तीन लाख किसानों को मिलता है वहीं पशुपालकों को दो लाख दिया जा रहा है। यदि किसान पशुपालन के साथ कृषि पालन करता है तो उसे तीन लाख का ऋण मिल सकता है। कार्यक्रम में मंडल के सभी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एवं उप निदेशक पशुपालन, तथा लीड बैंक के मैनेजर उपस्थित थे।

रेटिंग: 4.98
अधिकतम अंक: 5
न्यूनतम अंक: 1
मतदाताओं की संख्या: 746
उत्तर छोड़ दें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा| अपेक्षित स्थानों को रेखांकित कर दिया गया है *