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एक सीमा आदेश क्या है

एक सीमा आदेश क्या है
बरमान घाट, नर्मदा नदी, नरसिंहपुर

DISTRICT SAGAR

Collector Sagar

सागर जिला मध्यप्रदेश के उत्तर मध्य क्षेत्र में बसा हुआ है |यह अंग्रेजो के शासन के समय SAUGOR के रूप में वर्तनी था | यह 23 deg 10’ और 24 deg 27’ उत्तरी अक्षांश और 78 deg 4’ और 79 deg 21’ पूर्वी देशांतर के बीच बसा हुआ है | यह जिला देश के एक सीमा आदेश क्या है एकदम केंद्र स्थान में स्थित है | जिले के दक्षिणी भाग से होकर कर्क रेखा गुजरती है |

एक सीमा आदेश क्या है

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स्वतंत्रता की एक सीमा है

हमारे देश में नागरिकों को दिए गए मौलिक अधिकारों में कोई भी असीम नहीं है। जैसे अनुच्छेद 19(1)(ए) के अंतर्गत दिए गए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को 19(2) में सीमाओं में बांधा गया है। संविधान के मसौदे में इस अधिकार पर अंकुश लगाने का एक आधार ‘राजद्रोह’ को माना गया है। राजद्रोह को भारतीय दंड संहिता के भाग 124-ए के तहत ऐसा आपराधिक कृत्य माना गया है, जिसके लिए उम्रकैद एवं जुर्माने के दंड का प्रावधान है।

  • प्रिवी काऊंसिल ने सरकार के प्रति असंतोष या एक सीमा आदेश क्या है बुरी भावनाओं को उत्तेजक शब्दों में व्यक्त करने को राजद्रोह माना था। मुख्य न्यायाधीश मॉरिस ग्वायर की अध्यक्षता में फेडरल कोर्ट ने कहा कि, ‘सरकार की असफलता पर प्रहार करने वाली अभिव्यक्ति को राजद्रोह नहीं माना जा सकता।’
  • इसी संदर्भ में 1962 में केदारनाथ बनाम बिहार सरकार के मामले में उच्चतम न्यायालय ने फेडरल कोर्ट के आदेश को अपनाते हुए कहा कि ‘सरकार की कटु से कटु आलोचना को भी तब तक राजद्रोह नहीं माना जा सकता, जब तक कि उसमें हिंसात्मक तत्वों का समावेश न किया गया हो।’
  • 1995 में भी ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाने वाले के विरूद्ध 124-ए के अंतर्गत राजद्राह का मुकदमा चलाए जाने से उच्चतम न्यायालय ने इंकार कर दिया था। अगर कोई व्यक्ति हिन्दुस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाता है या भारत देश को अत्याचारी कहकर उसके पराभव की बात कहता है, तो संभवतः इसे राजद्रोह माना जा सके।
  • सरकारी विरोध को बर्दाश्त न करने वाली कई अभियोजन एजेंसी ने अनुच्छेद 124-ए का दुरुपयोग किया है। इसका एक हास्यास्पद उदाहरण वित्त मंत्री अरुण जेटली पर भी इस प्रकार का अभियोग चलाया जाना है। ऐसे मामलों में अभियोग चलाने का खंडन किया जाना चाहिए।

कुछ मामलों में अनुच्छेद 124-ए के दुरुपयोग होने से इस अनुच्छेद की सार्थकता को नकारकर इसका पूर्ण खंडन नहीं किया जा सकता। उचित प्रकार से व्याख्यायित एवं आरोपित किए जाने पर यह प्रावधान निश्चित रूप से देश की गरिमा, एकता और अखंडता की रक्षा करने का उत्तम अस्त्र है।

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित सोली जे सोराबजी के लेख पर आधारित।

District Narsinghpur

Collector Madam

नरसिंहपुर जिला मध्यप्रदेश राज्य के लगभग मध्य एक सीमा आदेश क्या है भाग में स्थित है । इसकी उत्तरी सीमा पर विंध्याचल और दक्षिणी सीमा पर पूरी लंबाई में सतपुड़ा श्रृंखला फैली हुई है । उत्तरी भाग में नर्मदा नदी पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है । अक्षांस 22º.45 उत्तर 23º.15 उत्तर, देशांतर 78º.38 पूर्व 79º.38 पूर्व, क्षेत्रफल 5125.55 स्क्वायर किलोमीटर, 359.8 मीटर समुद्र तल से ऊपर।

नया क्या है

  • संयुक्त बहुउद्देशीय परियोजना के निर्माण एवं पहुंच मार्ग निर्माण कार्य-ग्राम – हीरापुर
  • एक जिला एक उत्पाद अंतर्गत करेली गुड़ उत्पादक कृषकों के उत्पाद
  • धारणाधिकार इश्तिहार
  • कार्यालय सहायक सह डाटा एंट्री ऑपरेटर भर्ती के संबंध में मेरिट लिस्ट का प्रकाशन कराए जाने के संबंध में
  • जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट (SAND) जिला नरसिंहपुर
  • संयुक्त बहुउद्देशीय परियोजना के निर्माण एवं पहुंच मार्ग निर्माण कार्य-ग्राम – खिरेंटी

निविदाएं

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अधिसूचना

  • संयुक्त बहुउद्देशीय परियोजना के निर्माण एवं पहुंच एक सीमा आदेश क्या है मार्ग निर्माण कार्य-ग्राम – हीरापुर
  • धारणाधिकार इश्तिहार
  • कार्यालय सहायक सह डाटा एंट्री ऑपरेटर भर्ती के संबंध में मेरिट लिस्ट का प्रकाशन कराए जाने के संबंध में
  • जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट (SAND) जिला नरसिंहपुर
  • संयुक्त बहुउद्देशीय परियोजना के निर्माण एवं पहुंच मार्ग निर्माण कार्य-ग्राम – खिरेंटी

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शिव धाम, डमरू घाटी, गाडरवारा

टोनघाट

टोनघाट ( छोटा धुँआधार )

बरमान घाट, नर्मदा नदी

बरमान घाट, नर्मदा नदी, नरसिंहपुर

नर्मदा नदी

सतधरा घाट , नर्मदा नदी

चिनकी घाट, नर्मदा नदी

चिन्की घाट, नर्मदा नदी

डमरू घाटी_

डमरू घाटी, गाडरवारा

एनटीपीसी सुपर थर्मल पावर स्टेशन

बरमान घाट

नर्मदा नदी, बरमान घाट

टोनघाट

टोनघाट ( छोटा धुँआधार )

एक सीमा आदेश क्या है

सुप्रीम कोर्ट ने बदला एनजीटी का आदेश, सिपत सुपर थर्मल पावर स्टेशन के लिए बढ़ाई मोहलत

सुप्रीम कोर्ट ने सिपत सुपर थर्मल पावर स्टेशन की सभी पांच यूनिट्स में फ्ल्यू-गैस डिसल्फराइजेशन (एफजीडी) सिस्टम की स्थापना के लिए समय सीमा को बढ़ा दिया है

By Susan Chacko, Lalit Maurya

On: Sunday 26 July 2020

सुप्रीम कोर्ट ने सिपत एक सीमा आदेश क्या है सुपर थर्मल पावर स्टेशन की सभी पांच यूनिट्स में फ्ल्यू-गैस डिसल्फराइजेशन (एफजीडी) एक सीमा आदेश क्या है सिस्टम की स्थापना के लिए समय सीमा को बढ़ा दिया है। सिपत सुपर थर्मल पावर स्टेशन छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में स्थित है। सुप्रीम कोर्ट एक सीमा आदेश क्या है एक सीमा आदेश क्या है द्वारा यह आदेश 21 जुलाई, 2020 को जारी किया गया है। यह नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनटीपीसी) द्वारा दायर अपील के मद्देनजर दिया गया है। यह अपील नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा 27 फरवरी को दिए फैसले के खिलाफ दायर की गई थी।

गौरतलब है कि इससे पहले एनजीटी ने इस पावर प्लांट के सन्दर्भ में एनटीपीसी के लिए दो एक सीमा आदेश क्या है निर्देश जारी किए थे, जिसमें:

  • पहला छह महीने के भीतर फ्ल्यू-गैस डिसल्फराइजेशन (एफजीडी) संयंत्र की स्थापना करना; तथा
  • दूसरा यह सुनिश्चित करना कि कोयला ट्रांसपोर्ट करने वाले सभी रेलवे वैगनों को तिरपाल से कवर किया जाना चाहिए।

सॉलिसिटर जनरल, तुषार मेहता ने कोर्ट को जानकारी दी है कि एफजीडी संयंत्र को स्थापित करने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही यह भी जानकारी दी गई है कि 11 दिसंबर, 2017 को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यूनिट 1 और 2 के लिए 31 दिसंबर, 2022 और यूनिट 3 से 5 के लिए 31 दिसंबर, 2021 तक एफजीडी को लगाने का समय दिया था।

उन्होंने यह भी बताया कि एनजीटी ने इस काम के लिए छह महीने की मोहलत दी है जो अगस्त 2020 में ख़त्म हो जाएगी, लेकिन इतनी अवधि में इस काम का पूरा हो पाना असंभव है। हालांकि उन्होंने बताया कि तिरपाल से कवर करने के मुद्दे पर एनटीपीसी, रेल मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रहा है, और इस काम को निर्धारित एक महीने की अवधि में पूरा कर लिया जाएगा। मामले पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने समय-सीमा को बढ़ा दिया है। कोर्ट ने सीपीसीबी की निर्धारित सीमा के अनुसार यूनिट 1 और 2 के लिए 31 दिसंबर, 2022 और यूनिट 3 से 5 के लिए 31 दिसंबर, 2021 तक एफजीडी लगाने का समय दे दिया है। साथ ही वैगनों को तिरपाल से ढंकने के लिए तय समय सीमा को एक महीने का ही रखा है।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने एनटीपीसी को यह भी निर्देश दिया है कि इस काम को पूरा करने के लिए वो समय सीमा के भीतर सभी जरुरी कदम उठाए जिससे एनजीटी एफजीडी संयंत्र की स्थापना के लिए किये जा रहे कामों से संतुष्ट हो सके। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने हर तीन महीने के अंदर काम में हो रही प्रगति के विषय में एक रिपोर्ट एनजीटी में प्रस्तुत करने के भी आदेश दिए हैं जिससे काम की रफ्तार पर निगरानी रखी जा सके।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है चूंकि यह मामले पहले ही 28 जुलाई, 2020 को एनजीटी के समक्ष सूचीबद्ध है, ऐसे में उस तारीख पर अपीलकर्ता ने क्या ठोस कदम उठाएं हैं, उस बाबत एक हलफनामा एनजीटी में दायर किया जाना चाहिए जिसमें उन जरूरी क़दमों की जानकारी दी जाए जो अब तक उठाए गए हैं और आगे उठाए जाने हैं।

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