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समर्थन स्तर क्या है

समर्थन स्तर क्या है
किसानों को धान को सुखाकर लाने के लिए प्रेरित करें, ताकि उन्हें धान बेचने में परेशानी न हो. मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार के निर्देशानुसार, प्रत्येक वर्ष खरीदे जाने वाले धान में नमी का 17 प्रतिशत से कम होना चाहिए. इसका किसानों के बीच व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने धान की मिलिंग के लिए राइस मिलों के पंजीयन के कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए.

न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की खरीद : अब 72 घंटे के भीतर होगा भुगतान

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2022-23: नई सूची, Minimum Support Price लॉगिन

Minimum Support Price 2022-23 | आइये जाने न्यूनतम समर्थन मूल्य क्या है और Minimum Support Price का अर्थ व परिभाषा क्या है | MSP List कैसे चेक करे और डाउनलोड करे, Niyuntam Samarthan Mulya 2022 Online Check | सरकार द्वारा किसानों का विकास करने का निरंतर प्रयास किया जाता है। जिसके लिए सरकार विभिन्न प्रकार की योजनाएं संचालित करती है। भारत सरकार द्वारा फसल की खरीद पर एक न्यूनतम मूल्य का भुगतान किया जाता है। इस मूल्य को न्यूनतम समर्थन मूल्य कहा जाता है।

इस लेख के माध्यम से आज आप को Minimum Support Price से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की जाएगी। आप इस लेख को पढ़कर जान सकेंगे कि MSP 2022-23 क्या होता है। इसके अलावा आपको इसका उद्देश्य, लाभ, विशेषताएं, सूची, पात्रता आदि से संबंधित जानकारी भी प्रदान की जाएगी। तो यदि आप Niyuntam Samarthan Mulye का पूरा ब्यौरा प्राप्त करना चाहते हैं तो आप से निवेदन है कि आप हमारे इस लेख को अंत तक पढ़े।

Minimum Support Price 2022-23

न्यूनतम समर्थन मूल्य किसी भी फसल के लिए न्यूनतम मूल्य होता है जिसे सरकार समर्थन स्तर क्या है किसानों को प्रदान करती है। इस मूल्य से कम कीमत पर सरकार द्वारा फसल को नहीं खरीदा जा सकता। सरकार द्वारा न्यूनतम मूल्य पर फसल की खरीद की जाती है। केंद्र सरकार द्वारा वर्तमान में 23 फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य का भुगतान किया जाता है। जिसमें 7 अनाज (धान, गेहूं, मक्का, बाजरा, ज्वार रागी और जौ), 5 दाले (चना, अरहर, उड़द, मूंग और मसूर), 7 तिलहन (रेपसीड-सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी, तिल, कुसुम नाइजरसीड्) एवं 4 व्यवसायिक फसल (कपास, गन्ना, खोपरा और कच्चा जूट) शामिल है। किसान सम्मान निधि लिस्ट में अपना नाम देखें

Minimum Support Price किसानों एवं उपभोक्ताओं के लिए एक रियायती मूल्य सुनिश्चित करता है। कृषि लागत और मूल्य आयोग की सिफारिशों के आधार पर सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष अनाज, दलहन, तिलहन और वाणिज्यिक फसलों जैसे कृषि फसलों के लिए संबंधित राज्य सरकारों एवं केंद्रीय विभागों द्वारा विचार करने के पश्चात एमएससी की घोषणा की जाती है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य में की गई वृद्धि

जैसे कि आप सभी लोग जानते हैं सरकार द्वारा न्यूनतम मूल्य पर किसानों से फसल की खरीद की जाती है। जिससे कि किसी भी किसान की फसल खराब ना हो। सरकार द्वारा प्रत्येक फसल के लिए एक मूल्य निर्धारित किया गया है। जिससे नीचे उस फसल की खरीद नहीं की जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा रबी सीजन 2022- 23 के अंतर्गत रबी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। जिससे कि किसानों को अधिक आय की प्राप्ति हो सके। यह आदेश फसलों के विधिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है। मसूर, चना, जौ और कुसुम के फूलों के लिए किसानों को उनकी उत्पादन लागत की तुलना में अधिक मूल्य प्राप्त होगा। इसके अलावा तिलहन, दलहन और मोटे अनाज के पक्ष में न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया गया है।

एमएसपी के माध्यम से किसानों के लिए उत्पादन लागत पर कम से कम 50% का लाभ सुनिश्चित किया जाता है। इसके अलावा यदि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए अनुकूल शर्तें मिलती है या एमएसपी से बेहतर कीमत मिलती है तो वह गैर सरकारी दलों को अपनी फसल बेचने के लिए स्वतंत्र है। इस योजना को 1966 में आरंभ किया गया था। प्रतिवर्ष सरकार द्वारा 25 प्रमुख कृषि फसलों के लिए एमएसपी की घोषणा की जाती है। जिसमें खरीफ सीजन में 14 फसलें और रबी सीजन में 7 फसलें शामिल होती हैं। 2020-21 में इस योजना के माध्यम से 2.04 करोड़ किसान लाभवंती हुए हैं। यह योजना किसानों को उनकी फसल का सही दाम दिलवाने के उद्देश्य से आरंभ की गई थी। इस योजना के माध्यम से देशभर के किसान सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनेंगे एवं उनके जीवन स्तर में भी सुधार आएगा।

Key Highlights Of Minimum Support Price

योजना का नामन्यूनतम समर्थन मूल्य
किसने आरंभ कीकेंद्र सरकार
लाभार्थीदेश के किसान
उद्देश्यकिसानों को फसल का सही दाम प्रदान करना
आधिकारिक समर्थन स्तर क्या है वेबसाइटयहां क्लिक करें
साल2022

Minimum Support Price किसानों को अपनी फसल के सही दाम दिलवाने के उद्देश्य से आरंभ किया गया है। सरकार द्वारा लगभग 25 फसलों का एक न्यूनतम दाम तय कर दिया जाता है। जिस मूल्य से नीचे फसल को नहीं खरीदा जा सकता। यह योजना किसानों को उनकी फसल का सही दाम दिलवाने में कारगर साबित होंगी। इसके अलावा इस योजना के माध्यम से किसान सशक्त एवं आत्मनिर्भर भी बनेंगे। न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना किसानों के जीवन स्तर को सुधारने में भी कारगर साबित होगी। इसके अलावा उपभोक्ताओं तक भी फसल सही दामों में पहुंच सकेगी। इस मूल्य को कृषि लागत और मूल्य आयोग की सिफारिशों के आधार पर सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष घोषित किया जाता है।

छत्तीसगढ़ में 1 समर्थन स्तर क्या है नवंबर से खरीदी जाएगी धान की फसल, जानें कितना मिलेगा समर्थन मूल्य

Paddy crop (File Photo)

aajtak.in

  • रायपुर,
  • 30 अक्टूबर 2022,
  • (अपडेटेड 30 अक्टूबर 2022, 3:12 PM IST)

छत्तीसगढ़ में 1 नवंबर से धान के फसल की खरीदारी शुरू होने वाली है. इसके लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने निवास कार्यालय में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की तैयारियों की समीक्षा की और अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि धान बेचने वाले किसानों को समितियां और उपार्जन केन्द्रों में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए.

बता दें कि भूपेश सरकार की वापसी किसानों के दम पर हुई थी, इस दौरान किसानों का समर्थन मूल्य ₹25 सौ किया गया था और छत्तीसगढ़ में सरकार बनाई थी. अब सरकार 1 नवंबर से धान खरीदी शुरू कर रही है. धान खरीदी की सभी व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए मुख्य सचिव के नेतृत्व में जिलों के प्रभारी सचिव और कलेक्टर को मुस्तैद रहने के लिए कहा गया है. उन्होंने कहा कि समिति स्तर पर 1 नवंबर को किसानों की बैठक ली जाए और किसानों से धान आवागमन की प्लानिंग समिति स्तर पर की जाए. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के कई क्षेत्रों में बारिश के कारण धान कटाई पूरे तरीके से शुरू नहीं हुई है.

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बैठक में जानकारी दी गई कि खरीफ साल 2022-23 में एक लाख 29 हजार नए किसानों के एक लाख 9 हजार हेक्टेयर रकबे का नवीन पंजीयन किया गया है. इस प्रकार खरीफ साल 2022-23 में धान खरीदी के लिए 25 लाख 23 हजार किसानों के 29.42 लाख हेक्टेयर रकबे का पंजीयन किया जा चुका है.

गौरतलब है कि पिछले खरीफ वर्ष में धान खरीदी के लिए पंजीकृत किसानों की संख्या 24 लाख 5 हजार थी. बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि धान खरीदी के लिए वर्तमान में लगभग 3 लाख 92 हजार गठान नये, पुराने बारदाने उपलब्ध हो चुके हैं. इसके अलावा नये बारदानों की प्राप्ति तथा पुराने बारदानों के संकलन एवं सत्यापन का कार्य सतत रूप से पूरा किया जा रहा है. राज्य स्तरीय समिति के निर्णय के अनुसार, सभी जिलों में धान परिवहन हेतु परिवहनकर्ताओं से अनुबंध किया जा चुका है. साथ ही धान परिवहन हेतु अन्य आवश्यक तैयारियां भी पूर्ण की जा चुकी हैं.

Pivot Point

केन्द्र बिन्दु:
किसी विशेष स्टॉक के उच्च, निम्न और समापन मूल्यों के संख्यात्मक औसत की गणना करके प्राप्त तकनीकी संकेतक। धुरी बिंदु का उपयोग भविष्य कहनेवाला संकेतक के रूप में किया जाता है। यदि अगले दिन का बाजार मूल्य धुरी बिंदु से नीचे आता है, तो इसका उपयोग एक नए प्रतिरोध स्तर के रूप में किया जा सकता है। इसके विपरीत, यदि बाजार मूल्य धुरी बिंदु से ऊपर उठता है, तो यह नए समर्थन स्तर के रूप में कार्य कर सकता है।

समर्थन (स्तर खरीदें):
एक समर्थन स्तर एक मूल्य स्तर है जहां मूल्य समर्थन को खोजने के लिए जाता है क्योंकि यह नीचे जा रहा है। इसका मतलब है कि इस स्तर के टूटने के बजाय कीमत इस स्तर से "उछाल" होने की संभावना है। हालांकि, एक बार कीमत के इस स्तर से गुजरने के बाद, यहां तक ​​कि एक छोटी राशि के द्वारा, यह तब तक गिरना जारी रखने की संभावना है जब तक कि यह एक और समर्थन स्तर नहीं पाता।

यूपी में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कब चलेगी धान की खरीद (Minimum Support Prices)

लखनऊ संभाग के जनपद हरदोई, लखीमपुर तथा संभाग बरेली, मुरादाबाद, मेरठ, सहारनपुर, आगरा, अलीगढ़, झांसी में किसानों से धान की खरीद 1 अक्टूबर 2021 से शुरू की गई थी जो 31 जनवरी 2022 तक चलेगी। वहीं लखनऊ संभाग के जनपद लखनऊ, सीतापुर, रायबरेली, उन्नाव व चित्रकूट, कानुपर, अयोध्या, देवीपाटन, बस्ती, गोरखपुर, आजमगढ़, वाराणसी, मिर्जापुर एवं प्रयागराज मंडलों में 1 नवंबर 2021 धान की खरीद शुरू की गई थी जो 28 फरवरी 2022 तक चलेगी।

फसल विपणन वर्ष 2021-22 में यूपी सरकार की ओर से 70 लाख टन मीट्रिक धान की खरीदी का लक्ष्य रखा गया है। राज्य में धान खरीद शुरू होने के बाद से अब तक 1461 करोड़ 9 लाख रुपए की 7.52 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है। 20 नवंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में 6.125 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हुई है। भारतीय खाद्य निगम के मुताबिक 11 नवंबर तक देश में 231.36 लाख मिट्रिक टन धान की खरीद हुई है। जिसमें से सबसे ज्यादा 165.18 लाख मिट्रिक टन की खरीद पंजाब में हुई है। जबकि हरियाणा में 53.38 लाख मिट्रिक टन धान की खरीद हुई है। वहीं उत्तराखंड में 5.36 लाख मिट्रिक टन धान की खरीद की गई है।

क्या है यूपी में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2021 (MSP)

केंद्र सरकार प्रत्येक वर्ष खरीफ तथा रबी फसल को मिलाकर 23 फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करती है। यह मूल्य देश के सभी राज्यों के लिए एक सामान लागू होते हैं। इस वर्ष सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1940 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है। जबकि ग्रेड-ए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1960 रुपए प्रति निर्धारित किया गया है।

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मनोविज्ञानः शिक्षण की एक प्रक्रिया है ‘स्कैफल्डिंग’

आज़ादी के 75 साल: ‘नामांकन की प्रगति को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से सफल बनाने की है जरूरत’

सर्वे पर आधारित लेख: कोविड-19 के दौर में ऑनलाइन पढ़ाई की ज़मीनी वास्तविकता क्या थी?

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वाइगाट्सकी ने संभावित विकास क्षेत्र (ZPD) का संप्रत्यय भी दिया।

रूसी मनोवैज्ञानिक लिव सिमानोविच वाइगाट्सकी ने स्कैफल्डिंग का विचार दिया। शिक्षा के क्षेत्र में इस विचार का सफलतापूर्वक इस्तेमाल भाषा शिक्षण के लिए भारत में किया जा रहा है। छोटे बच्चों को इस तकनीक से बुनियादी बातों को सीखने में काफी मदद मिली है।

स्कैफल्डिंग का अनुवाद ढांचा-निर्माण किया गया है, इसका तात्यपर्य है छात्रों को सीखने और समस्या समाधान के लिए दिए जाने वाले समर्थन (Support) से है।

स्कैफल्डिंग का व्यावहारिक उदाहरण

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स्कैफल्डिंग एक प्रकार की शिक्षण प्रक्रिया है, जिसमें बच्चों को दिये जाने वाले निर्देश की मात्रा तथा स्वरूप उनके विकास के स्तर के अनुरूप होता है। बच्चों को दिया जाने वाले समर्थन या सहयोग तब वापस ले लिया जाता है जब बच्चा स्वतंत्र रूप से किसी काम को करने लग जाता है। इस प्रक्रिया में बड़े या शिक्षक की तरफ से उस समय समर्थन वापस लिया जाता है, जब बच्चा उच्च क्षमता व आत्मविश्वास के साथ के साथ कोई काम करना सीख जाता है।

नये कौशल सीखने के लिए उपयोगी है स्कैफल्डिंग

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