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एक विदेशी मुद्रा विशेषज्ञ बनें

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इससे पहले ‘कोलंबो पेज’ अखबार की खबर में कहा गया था कि इस कदम का उद्देश्य घंटों तक बिजली कटौती एक विदेशी मुद्रा विशेषज्ञ बनें के बीच भोजन, आवश्यक वस्तुओं, ईंधन और दवाओं की कमी से जूझ रहे लोगों को राहत पहुंचाने में सरकार की नाकामी के विरोध में कोलंबो में लोगों को एकत्रित होने से रोकना था. साइबर सुरक्षा और इंटरनेट पर नजर रखने वाले निगरानी संगठन ‘नेटब्लॉक्स’ ने श्रीलंका में मध्यरात्रि के बाद रविवार को फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सऐप, वाइबर और यू्ट्यूब समेत कई सोशल मीडिया मंचों पर पाबंदी लगाए जाने की पुष्टि की.

Sri Lanka Crisis: श्रीलंका में बेकाबू हालात, इमरजेंसी के बीच पूरी कैबिनेट ने दिया इस्तीफा, लेकिन PM बने रहेंगे राजपक्षे

By: ABP Live | Updated at : 04 Apr 2022 07:19 AM (IST)

अब तक के सबसे बड़े आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका के कैबिनेट मंत्रियों ने रविवार देर रात तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया. देश के शिक्षा मंत्री और सदन के नेता दिनेश गुणवर्धने ने कहा कि कैबिनेट मंत्रियों ने श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे को अपना इस्तीफा सौंप दिया. उन्होंने सामूहिक इस्तीफे का एक विदेशी मुद्रा विशेषज्ञ बनें कोई कारण नहीं बताया.

बहरहाल, राजनीतिक विशेषज्ञों ने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार में कमी के कारण पैदा हुए आर्थिक संकट से सरकार द्वारा कथित रूप से 'गलत तरीके से निपटे जाने' को लेकर मंत्रियों पर जनता का भारी दबाव था. कर्फ्यू के बावजूद शाम को व्यापक स्तर पर प्रदर्शन हुए. प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.

बैंकिंग से संबंधित मूल बातें

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इन दस्‍तावेजों की 1 लाएँ :

  • स्थायी निवास कार्ड
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  • अस्थायी परमिट (उदा., आईएमएम प्रपत्र 1442, 1208, 1102)

और इन दस्‍तावेजों की 2 लाएँ :

  • वैध पासपोर्ट
  • कैनेडा​​​​​​​ का ड्राइविंग लाइसेंस
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टिप्‍पणी - अन्य आईडी दस्तावेज़ भी मान्य हो सकते हैं या आवश्यक हो सकते हैं। विवरण के लिए टीडी की किसी शाखा में पधारें।

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डॉ. वेदप्रताप वैदिक का कॉलम: भारत द्वारा श्रीलंका को दी जा रही मदद सभी पड़ोसी देशों के लिए भाईचारे का संदेश

डॉ. वेदप्रताप वैदिक, भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष - Dainik Bhaskar

श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्ष ने नया मंत्रिमंडल नियुक्त किया है और अपनी एक विदेशी मुद्रा विशेषज्ञ बनें सरकार की गलतियों के लिए सार्वजनिक क्षमा-याचना भी की है, लेकिन श्रीलंका की जनता का गुस्सा बरकरार है। राजपक्ष के अपने समर्थक विरोधियों से जा मिले हैं और रोज ही राष्ट्रपति भवन का घेराव हो रहा है। श्रीलंका के शहरों और गांवों में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस और फौज का दम फुला दिया है। श्रीलंका का सबसे बड़ा विरोधी दल राष्ट्रपति के विरुद्ध संसद में अविश्वास का प्रस्ताव पेश कर रहा है।

यह तब हो रहा है, जब राजपक्ष परिवार के कई सदस्यों को नए मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है। श्रीलंका की सरकार में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तो गोटबाया परिवार के थे ही, उनके साथ-साथ दो अन्य भाइयों और एक भतीजे को भी मंत्री बना दिया गया था। इन पंच परमेश्वरों से बने गोटबाया परिवार ने श्रीलंका में लगभग तानाशाही राज चला रखा था। अब भी श्रीलंका के दो सर्वोच्च पदों- राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री- पर राजपक्ष-बंधु डटे हुए हैं। यह राजपक्ष परिवार ही श्रीलंका की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार है।

आम बजट 2019 से बनारस के शिल्पकारों में उल्लास

जीआई प्रॉडक्ट का नमूना

वाराणसी. एनडीए सरकार-2 के पहले बजट से बनारस के शिल्पकारों की बांछें खिल गई है। ऐसा हो भी क्यों न,बजट एक विदेशी मुद्रा विशेषज्ञ बनें में पहली बार जीआई और बौद्धिक सम्‍पदा के प्रमोशन का प्रावधान किया है। ऐसे में उनका कहना है कि इससे न केवल शिल्पकारों का हौसला बढेगा बल्कि उनके उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय मार्केट मिलेगा और देश को विदेशी मुद्रा मिलेगी।

हस्‍तकला और उत्‍कृष्‍ट कारीगरी के लिए दुनिया में विख्‍यात बनारस के जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) एवं एक विदेशी मुद्रा विशेषज्ञ बनें बौद्धिक सम्‍पदा (आईपीआर) अधिकार में शामिल उत्‍पादों से जुड़े शिल्पकारों की ‘तकदीर’ बदलने वाली है।

शुक्रवार को संसद में पेश पहले आम बजट में पहली बार जीआई व बौद्धिक सम्‍पदा के प्रमोशन का प्रावधान किया गया है। इससे जीआई का हब बने बनारस के शिल्पकारों को अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार का लाभ मिलना तय है। साथ ही केंद्र सरकार के विभिन्‍न मंत्रालयों के जरिए ट्रेनिंग से लेकर क्लस्‍टर आदि की सुविधाओं से जिंदगी बदल जाएगी।

डॉ. वेदप्रताप वैदिक का कॉलम: भारत द्वारा श्रीलंका को दी जा रही मदद एक विदेशी मुद्रा विशेषज्ञ बनें सभी पड़ोसी देशों के लिए भाईचारे का संदेश

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श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्ष ने नया मंत्रिमंडल नियुक्त किया है और अपनी सरकार की गलतियों के लिए सार्वजनिक क्षमा-याचना भी की है, लेकिन श्रीलंका की जनता का गुस्सा बरकरार है। राजपक्ष के अपने समर्थक विरोधियों से जा मिले हैं और रोज ही राष्ट्रपति भवन का घेराव हो रहा है। श्रीलंका के शहरों और गांवों में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस और फौज का दम फुला दिया है। श्रीलंका का सबसे बड़ा विरोधी दल राष्ट्रपति के विरुद्ध संसद में अविश्वास का प्रस्ताव पेश कर रहा है।

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